Shankuntala Devi Life Story – भारत की ‘मानव कंप्यूटर’ शकुंतला देवी की जीवनी

अगर मैं आपसे ये कहूं कि हमारे भारतवर्ष में एक ऐसी विदुषी महिला हुई थी, जिनका मष्तिस्क गणना करने की गति में कम्प्यूटर्स को भी पीछे छोड़ देता था !!
तो क्या आप मुझ पर यकीन करेंगे ?

नहीं न ! किन्तु आज मैं आपको उन हस्ती के बारे में बताऊंगी जिसने यह कीर्तिमान हासिल किआ था|तो चलिए जानते है ह्यूमन कंप्यूटर, The Guinness Book of World Records में अपना नाम दर्ज करवाने वाली शकुंतला देवी जी के बारे में कुछ तथ्य –

1. प्रारंभिक जीवन –

एक बार वे अपनी 3 साल की बेटी शकुंतला के साथ ताश के पत्तों वाला खेल खेल रहे थे, उसी क्षण उन्हें अपनी बेटी के असामान्य स्मरण शक्ति के बारे में बोध हुआ, जबकि उस समय तक शकुंतला देवी जी की फॉर्मल स्कूलिंग शुरू भी नहीं हुई थी और न ही उन्होंने ने कोई विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किआ था |

उनकी यह प्रतिभा जंगल की आग की भांति फैलती गयी एवं उन्हें महज़ 6 वर्ष की आयु में मैसूर विश्वविद्यालय में अपनी प्रतिभा दिखने का अवसर प्राप्त हुआ, वह इन्होने उपस्थित सभी शिक्षकों को अपनी गणितीय प्रतिभा से आचम्भित कर दिया |

इसके बाद इनके पिताजी ने सर्कस की नौकरी दी और लोगों को अपनी बेटी की स्मरण शक्ति के करतब दिखने का कार्य शुरू किआ| इतना ही नहीं, वे चाँद सेकण्डों में बड़ी सी बड़ी गणितीय गणना को आसानी से हल कर लेती थी, फिर चाहे वो जोड़ हो या बड़ी से बड़ी संख्याओं का गुना |

वर्ष 1944 में शकुन्तला देवी अपने पिताजी के साथ London गयीं। वहां पर उन्होंने कई संस्था व विद्यालयों में अपनी Maths Skills का प्रदर्शन किया। उनकी गणितिक काबिलियत से ब्रिटिश मिडिया चकित रह गया। इसी कारणवश उन्हें वहां पर बहुल लोकप्रियता और विशेष सम्मान मिला।

2. विदेश यात्रा एवं प्रसिद्धियाँ

भारत में अभूत्पूर्व प्रसिद्धी पाने के बाद उन्होंने विदेशो में 50 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किआ | इन्होने बहुत से टेलीविज़न चैनेलो में भी अपनी प्रतिभा से लोगो को चौकाया|

वर्ष 1944 में शकुन्तला देवी अपने पिताजी के साथ London गयीं। वहां पर उन्होंने कई संस्था व विद्यालयों में अपनी Maths Skills का प्रदर्शन किया। उनकी गणितिक काबिलियत से ब्रिटिश मिडिया चकित रह गया। इसी कारणवश उन्हें वहां पर बहुल लोकप्रियता और विशेष सम्मान मिला।

Shakuntala Devi’s Books

Shankuntala devi

3. BBC Media के किस्से –

इस पर शकुंतला जी ने कहा की आप अपना मूल उत्तर की जाँच कीजिये इस तरह बाद में यह पता चला की, मूल उत्तर ही गलत था और शकुन्तला देवी द्वारा बताया गया जवाब सही था। यह बात पुरे विश्व में आग की तरह फ़ैल गयी, चूँकि उस वक्त ना तो शकुन्तला देवी सामान्य हस्ती थीं और ना ही बी.बी.सी मिडिया छोटी संस्था थी।

4. वैवाहिक जीवन –

जब 1960 के मध्य दौर में शकुंतला देवी लंदन में अपनी प्रतिभा दिखाकर वापस लौटी तो उन्होंने कोलकाता के आई.ए.एस. अफसर पारितोष बैनर्जी से विवाह किआ|सब कुछ कुशल चल रहा था जब तक उन्होंने अपनी पत्नी से अपने Gay होने की बात का खुलासा नहीं किआ था, बाद में इस दम्पति का तलाक हो गया |

5. समलैंगिगता पर प्रकाश –

इस किताब पर उन्हें बहुत से आलोचनाओं का सामना करने को मिला, क्योंकि उस समय भी भारत में इस विषय पर बात करना Taboo मन जाता था तो इस पर किताब लिखने की बात तो छोड़ ही दीजिये|

किन्तु उनकी दूरदर्शिता का आंकलन इसी बात से लगाया जा सकता है, कि जिस धारा 377 को भारत ने 2018 में खंडित किया, इस बात को उन्होंने 1977 में विश्व के सामने लाया था|

6. राजनीती में कदम –


वर्ष 1980 के लोकसभा चुनाव में चुनाव क्षेत्र दक्षिण मुंबई और मेडक (वर्तमान – तेलंगाना का एक भाग) से इंदिरा गाँधी के विरूद्ध खड़े होने का निर्णय लिया, किन्तु उन्हें बुरी तरह उसमे हार का सामना करना पड़ा एवं मात्र

इसके बाद वें वापस बेंगलुरु वापस लौट आईं|

7. 201 digit number का 23rd root सिर्फ 50 second में –


सामान्य मनुष्य को किसी संख्या का 2nd या 3rd root निकालने में समय लग जाता है, किन्तु उन्होंने 23rd root सिर्फ 50 second में निकाल दिए थे |

1977 में, डलास में दक्षिणी मेथोडिस्ट विश्वविद्यालय में, देवी को 201-अंक की संख्या का 23rd रूट निकालने को दिया गया। आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने सिर्फ 50 second में सही उत्तर दे दिया, यूनीवैक 1101 कंप्पयूटर को उसे हल करने में 1 मिनट से अधिक का समय लगा, वो भी एक स्पेशल प्रोग्राम लिखने के बाद।

वो नंबर था –

916,748,676,920,039,158,

098,660,927,585,380,162,

483,106,680,144,308,622,

407,126,516,427,934,657,

040,867,096,593,279,205,

767,480,806,790,022,783,

016,354,924,852,380,335,

745,316,935,111,903,596,

577,547,340,075,681,688,

305,620,821,016,129,132,

845,564,805,780,158,806,771

और उत्तर था – 546,372,891

8. The Guinness Book of Records में नाम दर्ज –

वर्ष 1980 में 18 जून के दिन शकुन्तला देवी लंदन के इंपीरियल कॉलेज में उपस्थित थीं।

वहाँ पर कंप्यूटर विभाग द्वारा Randomly उन्हें दो 13 अंकीय संख्या निकाल कर दी गयीं। (7,686,369,774,870 × 2,465,099,745,779)। कुछ ही देर में देवी नें इन दोनों संख्या का गुणक (Multiplication) कर के बता दिया। यह उत्तर उन्होंने 28 सेकंड में दिया था। (जवाब: 18,947,668,177,995,426,462,773,730 था) उनकी ऐसी गज़ब प्रतिभा से वहां मौजूद सभी लोग रोमांचित हो गए।

तो इस तरह यह ऐतिहासिक प्रसंग…

शकुन्तला देवी के नाम के साथ वर्ष 1982 में The Guinness Book of Records में दर्ज हुआ।

9. इनके द्वारा लिखी गयी प्रमुख क़िताबें –


चूकी ये ब्राम्हण परिवार से थीं इसीलिए गणित के साथ – साथ इन्हे Astrology में भी बहुत रूचि थी, इनके द्वारा लिखी गयी क़िताबों में Astrology पर लिखी किताब भी एक है |

  1. Astrology for You.
  2. In the Wonderland of Numbers.
  3. Mathability : Awaken the Math Genius in Your Child.
  4. Perfect Murder.
  5. Puzzles to Puzzle You.
  6. Super Memory: It Can Be Yours.
  7. The World of Homosexuals.

10. पुरुष्कार एवं सम्मान –


वैसे तो इन्हे बहुत से पुरुष्कारों ने सम्मानित किया जा चूका है, जिनमे से नीचे लिखे प्रमुख है

  • “वर्ष की विशेष महिला” का पुरस्कार एवं गोल्ड मेडल भेंट – दाता: फिलिपिन्स विश्वविद्यालय (वर्ष 1969)
  • रामानुजन मैथेमेटिकल जिनियस पुरस्कार – स्थान: वाशिंग्टन डी.सी. (वर्ष 1988)
  • असामान्य गाणितिक प्रतिभा हेतु – सम्मान: गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रेकोर्ड में नाम अंकित (वर्ष 1982)
  • “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” स्थान: मुंबई भारत (वर्ष 2013)
  • Google Doodle Honor – 84 वें जन्म तिथि निमित – वेबसाईट: गूगल सर्च (4 नवंबर 2013)

11. शकुन्तला देवी जी का स्वर्गवास –


वर्ष 2013 के अप्रैल महीने में शकुन्तला देवी की तबियत बिगड़ी। तब उन्हें बेगलुरु के एक नामी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस वक्त वह सांस की समस्या से पीड़ित थीं, उपचार की हर एक मुमकिन कोशिश हुई। उस समय इनकी देखभाल इनकी बेटी अनुपमा बैनर्जी कर रही थी, लेकिन समय बीतने के साथ उन्हें दिल और गुर्दों की भी समस्या हो गयी, 21 अप्रैल 2013 के दिन ह्रदय गति रुक जाने से अस्पताल में ही उनकी मृत्यु हो गयी।

12. बायोपिक –


शकुंतला देवी जी के जीवर पर आधारित एक बायोपिक बन चुकी है, जो इस वर्ष 2020 में परदे पर आई|जिसमे मुख्य किरदार में विद्या बालन नज़र आ रही हैं|

मुझे उम्मीद है कि, शकुंतला देवी जी के बारे में जानकर आपको गौरान्वित महसूस हुआ होगा|आपको ये जानकारी कैसी लगी ? कमेंट करके जरूर बताये।

Manisha Rajput

Hello! I'm Manisha Rajput. I love write about amazing unknown facts which is useful in practical life!

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