ताजमहल से पुराना छत्तीसगढ़ में है यह प्रेम का प्रतीक।

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वैसे तो छत्तीसगढ़ में बहुत सी विलक्षण स्थान है। जिनमें सिरपुर का एक मंदिर देश दुनिया में बहुत विख्यात है। इसका अपना एक ऐतिहासिक महत्व है। आज हम एक ऐसे ही स्थान की चर्चा करने वाले हैं जो ताजमहल से भी पुराना प्रेम का प्रतीक है।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक गांव सिरपुर है, जो कि राजधानी रायपुर से 78 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां भारत का पहला ऐसा मंदिर है जो ईटों से निर्मित है। जिसे हम सभी लक्ष्मण मंदिर के नाम से जानते हैं। सिरपुर में स्थित यह मंदिर लाल ईंटों से निर्मित है। सामान्यतः यह एक साधारण हिंदू मंदिर की तरह ही नजर आता है। लेकिन वास्तु, स्थापत्य और इसके निर्माण के पीछे की भावना की वजह से इसे लाल ताजमहल भी कहा जाता है।

इस मंदिर का निर्माण छठवीं शताब्दी में दक्षिण कौशल के पांडू वंश के राजा हर्षगुप्त की मृत्यु पर उनकी पत्नी वासटा देवी ने अपने पति की स्मृति में सिरपुर में करवाया था। जो कि एक विष्णु मंदिर है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर पूर्णत: ईंटों से निर्मित है। इस मंदिर में नक्काशियों से शेषनाग पर लेटे हुए भगवान विष्णु और भागवत पुराण से भगवान श्री कृष्ण के दृश्य को दिखाया गया है।

अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा 1872 में सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर पर उनकी रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय ध्यान में लाई गई। अपनी विलक्षण बनावट और अतीत की स्मृतियों को समेटे हुए यह मंदिर आज भी विद्यमान है।

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