जानिए Albert Einstein का दिमाग क्यों था खास ?

आज हम बात करेंगे जीनियस ये वर्ल्ड को सुनते ही आप सभी के दिमाग में अल्बर्ट आइंस्टीन का नाम तो आया ही होगा | जैसे की हम सभी जानते है अल्बर्ट आइंस्टीन कितने बड़े वैज्ञानिक थे, जो की मानव इतिहास के बुद्धिमान व्यक्ति थे | उन्होंने अपने खोजों के आधार पर अंतरिक्ष ,समय और गुरुत्वाकर्षण जैसे कई सिद्वांत दिये | पर हमेशा से वो इतने बुद्धिमान नहीं थे, बचपन से पढ़ाई में कमजोर होने के कारण अल्बर्ट आइंस्टीन को मंदबुद्धि भी कहा जाने लगा था|उनका जो दिमाग (Brain) जो हमेशा चर्चा का टॉपिक रहा हैं| इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे की अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग इतना खास क्यों है|

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम कुछ ऐसी आदतों को जानेंगे|जिन्हे फॉलो करके आप भी अपना दिमाग बेहतर बना सकते हो |उनकी आदतों को जानने से पहले उनके बारे में जान लो की आखिर वो कैसे एक महान वैज्ञानिक बने|आज 60 साल से ज्यादा साल हो गये आइंस्टीन हमें छोड़ के चले गए है |लेकिन आज भी साइंस उनकी थीसिस के बिना कमजोर है|तो यही वजह है हर कोई उनके दिमाग के बारे में जानना चाहता है|की आखिर उनके ब्रेन में ऐसा क्या था जो की उन्हें इस मुकाम तक ले आया आज उन्हें दुनियाभर में महान वैज्ञानिक के नाम से जाना जाता है|तो आज इस पोस्ट में हम इसी विषय में चर्चा करेंगे|

प्रारंभिक जीवन 

अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 को हुआ था| र्मनी में वुटेमबर्ग के एक यहूदी परिवार में हुआ। जर्मनी में वुटेमबर्ग के एक यहूदी परिवार में हुआ।उनके पिता पेशे से इंजिनियर और सेल्समैन थे |उनके पिता का नाम हेर्मन्न आइंस्टीन और उनकी माता का नाम पौलिन कोच था|

उनके पैदा होने के बाद डॉक्टर्स ने नोटिस किया की उनका सर किसी भी सामान्य बच्चे से आकार में काफी बड़ा था| वो एक असामान्य बच्चे के रूप में जन्मे थे|उसके बाद भी उसका दिमाग इतना तेज़ था की आज भी कोई उनका मुकाबला नहीं कर पाया |कोई भी आम बच्चा एक या दो साल में बोलना सीख जाता है | पर अल्बर्ट आइंस्टीन को शुरू से बोलने में कठिनाई होती थी,और वो चार साल उम्र तक कुछ भी नहीं बोल पाये|मगर फिर एक दिन जब वह अपने परिवार के साथ रात को भोजन कर रहे थे तब उन्होंने पहली बार कहा “soup is too hot “कहा था|अपने बेटे को इतना साफ बोल देखकर उनके माता-पिता हैरान हो गए और खुश भी बहुत हुए |लेकिन बाद में जब उनसे पूछा गया की अब तक तुम क्यों कुछ नहीं बोल रहे थे, तो आइंस्टीन ने बड़ा अजीब सा जवाब दिया की अब तक तो सब सही था

अल्बर्ट आइंस्टीन के जीवन से जुड़े अजीबो गरीब किस्से:

उनके बड़े होने के बाद भी उनके ऐसे आदतें थी,जिनके बारे में सुनकर हर कोई हैरान हो जाता है|

अल्बर्ट आइंस्टीन की याददाश बहुत ख़राब होने के कारण, उनको किसी का नाम, नम्बर और दिनाँक याद रखने में परेशानी होती थी,एक बार उनके सहकर्मी ने उनका टेलीफोन नम्बर माँगा तो आइंस्टीन उनके पास रखे डाइरेक्ट्री में अपना नंबर ढूढ़ने लगे|तो आइंस्टीन ने कहा की किसी ऐसी चीज़ को याद रख के की क्या करूँगा जो डायरी में मिल जाता है |

आइंस्टीन कभी जूतों के अंदर मोज़े नहीं पहनते थे ,क्योकि उनके पैरो की उंगलियां इतनी बड़ी थी की उनके मोजे हमेशा फट जाते थे,इसलिए उन्होंने मोजा पहनना ही बंद क्र दिया|यहाँ तक वे अपने जूते के फीते भी दूसरो से बंधवाते थे|

आइंस्टीन हमेशा कहते थे की मेरे अंदर कोई ऐसे खास चीज़ तो नहीं,लेकिन मैं कोई ऐसा इंसान हूँ मेरे अंदर जानने की इच्छा बहुत है|

आपको यह जानकर हैरानी होगी,पर हमेशा से वो इतने बुद्धिमान नहीं थे, बचपन से पढ़ाई में कमजोर होने के कारण अल्बर्ट आइंस्टीन को मंदबुद्धि भी कहा जाने लगा था|बचपन में उनकी गिनती बेकवूफ बच्चो में की जाती थी,उनकी कुछ हरकतों के कारण उन्हें कुछ लोगो ने शारारिक विकलांग कहना शुरू कर दिया था |

उनके टीचर भी उन्हें पसंद नहीं करते थे क्योकि वो सिर्फ मैथ्स और साइंस विषय में पास होते थे बाकि हर विषय में फ़ैल होते थे|बचपन से उन्हें किताबी ज्ञान में कोई रूचि नहीं थी,फिर भीउन्होंने ने साइंस की कई ऐसी थीसिस पेश की जिसके बिना साइंस आज भी कमजोर है|और यही वजह है उनका दिमाग (Brain) आज भी चर्चा का विषय बना है |

उनका दिमाग (Brain) आज भी चर्चा का विषय बना है |

जर्मन मूल के अमरीकी वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन जीनियस थे. सन 1955 में उनकी मृत्यु के बाद से ही अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय रहा है. आखिर अल्बर्ट आइंस्टीन के दिमाग में ऐसा क्या था|जिसके कारण आइंस्टीन ने इतने भौतिक खोज किये|आइंस्टीन ने 300 से अधिक वैज्ञानिक शोध-पत्रों का प्रकाशन किया।

Dr.Thomas Harvey ने आइंस्टाइन की मृत्यु के बाद उनके परिवार की अनुमति के बिना उनका दिमाग निकाल लिया गया। Dr.Thomas Harvey ने उनके दिमाग पर रिसर्च करने के लिए निकाल लिये थे |उन्हें नौकरी से निकल दिया गया | उन्होंने वादा किया की वे आइंस्टीन के दिमाग के बारे में जरूर पता करेंगे |ताकि आने वाले समय में इससे साइंस और साइंटिस्ट को कुछ फायदा हो सके|लेकिन परमिशन न मिल पाने के कारण Dr.Thomas Harvey ने आइंस्टाइन के दिमाग को एक जार के अंदर कैद रखा |

बाद में1975 में उनके बेटे Hans की आज्ञा मिलने पर उन्होंने ने आइंस्टाइन के दिमाग में दिमाग का रिसर्च शुरू किया|

सबसे पहले उन्होंने उनके दिमाग का वजन नापा जिसका वजन 1230 ग्राम था,जो सामान्य इंसान के हिसाब से काफी छोटा था,एक इंसान के दिमाग का वजन 1400 ग्राम होता है |उसके बाद Dr.Harvey ने उनके दिमाग के 240 सैंपल कई वैज्ञानिकों के पास भेजे जिन्हें देखने के बाद उन्होने पाया कि उन्के दिमाग में आम इन्सान से ज्यादा cells की गिनती हुई|

कुछ साल पहले हुए एक शोध में पता चला कि आइंस्टाइन क दिमाग का CEREBRAL CORTEX नाम का हिस्सा एक आम इंसान के मुकाबले से अलग था ,CEREBRAL CORTEX यानि प्रमस्तिष्क प्रांतस्था मानव के दिमाग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो सबसे जटिल माना जाता है,जिनके कारण उनका दिमाग आसाधारण सोचता था

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